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अन्नपूर्णास्तोत्रम्

Annapurna Stotram

स्तोत्र · 🌺 देवी · Sanskrit · ⏱ 1 min

अन्य नाम · Also known as अन्नपूर्णास्तोत्रम्

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अक्षर का आकार

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी ।
प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥१॥

नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी मुक्ताहारविलम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी ।
काश्मीरागुरूवासिता रुचिकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥२॥

योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्माथनिष्ठाकरी चन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी ।
सर्वैश्वर्यसमस्तवांछनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥३॥

कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी उमाशङ्करी कौमारी निगमार्थगोचरकरी ॐकारबीजाक्षरी ।
मोक्षव्दारकपाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥४॥

दृश्यादृश्यविभूतवाहनकरी ब्रम्हाण्डभाण्डोदरी लीलानाटकसूत्रभेदनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी ।
श्रीविश्वेशमनःप्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥५॥

उर्वी सर्वजनेश्वरी भगवती मातान्नपूर्णेश्वरी वेणीनीलसमानकुन्तलहरी नित्यान्नदानेश्वरी ।
सर्वानन्दकरी सदाशुभकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥६॥

आदिक्षान्तिसमस्तवर्णनकरी शम्भोस्त्रिभावाकरी काश्मीरात्रिपुरेश्वरी त्रिनयनी नित्याङ्कुरा शर्वरी ।
कामाकाङ्क्षकरी जनोदयकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥७॥

देवी सर्वविचित्ररत्नरचिता दाक्षायणी सुन्दरी वामा स्वादुपयोगधरप्रियकरी सौभाग्यमाहेश्वरी ।
भक्ताभीष्टकरी दशाशुभहरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥८॥

चन्द्रार्कालयकोटिकोटिसदृशा चन्द्रांशुबिम्बाधरी चन्द्रार्काग्निसमानकुंडलधरी चन्द्रार्कवर्णेश्वरी ।
मालापुस्तकपाशसांकुशधरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥९॥

क्षत्रत्राणकरी महाऽभयकरी माता कृपासागरी साक्षान्मोक्षकरी सदा शिवकरी विश्वेश्वरी श्रीधरी ।
दक्षाक्रन्दकरी निरामयकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥१०॥

भगवति भवरोगात्पीडितं दुष्कृतोत्थात् सुतदुहितृकलत्रोपद्रवेणानुयातम् ।
विलसदमृतदृष्ट्या वीक्ष्य विभ्रान्तचित्तं सकलभुवनमातस्त्राहि मामों नमस्ते ॥११॥

माहेश्वरीमाश्रितकल्पवल्लीमहम्भवोच्छेदकरीं भवानींम् ।
क्षुधार्तजायातनयाद्युपेतस्त्वामन्नपूर्णे शरणं प्रपद्ये ॥१२॥

दारिद्र्यदावानलदह्यमानं पाह्यन्नपूर्णे गिरिराजकन्ये ।
कृपाम्बुधौ मज्जय मां त्वदीये त्वत्पादपद्मार्पितचित्तवृत्तिम् ॥१३॥

अन्नपूर्णे सदा पूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे ।
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति ॥१४॥

माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः ।
बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वेदेशो भुवनत्रयम् ॥१५॥

इति श्रीमच्छंकराचार्यविरचितमन्नपूर्णास्तोत्रं संपूर्णम् ।

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आन्नपूर्ण देवी

स्रोत · Source

Sanskrit Wikisource, page "अन्नपूर्णास्तोत्रम्", revision 180872.
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