शिव चालीसा
चालीसा · 🔱 भगवान शिव · Hindi · ⏱ 4 min
अन्य नाम · Also known as शिव चालीसा · Shiv Chalisa
॥ ॐ नमः शिवाय ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम, देउ अभय वरदान ॥
जय गिरिजापति दीनदयाला । सदा करत संतन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके । कानन कुंडल नागफनी के ॥
संग गौर सिर गंग बहाये । मुंडमाल तन क्षार लगाये ॥
वस्त्र खाल वाधम्बर सोहै । छवि को देखि नाग मुनि मोहै ॥
मैना मातु कि हवै दुलारी । वाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी । करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
नंदि गणेश सोहैं तहँ कैसे । सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ । या छवि को कहि जात न काऊ ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा । तबहीं दुःख प्रभु आप निवारा ॥
कियो उपद्रव तारक भारी । देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥
तुरत षडानन आप पठायउ । लव निमेष महँ मारि गिरायउ ॥
आप जलंधर असुर संहारा । सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई । सबहिं कृपा करि लीन बचाई ॥
किया तपहिं भगीरथ भारी । पुरव प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥
दानिन महँ तुम सम कोइ नाहीं । सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥
वेद माहि महिमा तब गाई । अकथ अनादि भेद नहीं पाई ॥
प्रकटी उदधि मथन ते ज्वाला । जरत सुरासुर भए विहाला ॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई । नीलकंठ तव नाम कहाई ॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा । जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥
सहस कमल में हो रहे धारी । कीन्ह परीक्षा तबहीं पुरारी ॥
एक कमल प्रभु राखेउ गोई । कमल नैन पूजन चहँ सोई ॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर । भये प्रसन्न दिये इच्छित वर ॥
जय जय जय अनंत अविनाशी । करत कृपा सबके घटवासी ॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावैं । भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारौं । यहि अवसर मोहि आन उबारो ॥
ले त्रिशूल शत्रुन को मारो । संकट ते मोहि आन उबारो ॥
मात-पिता भ्राता सब होई । संकट में पूछत नहीं कोई ॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी । आय हरहु मम संकट भारी ॥
धन निर्धन को देत सदाहीं । जो कोई जाँचे सो फल पाहीं ॥
स्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी । क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥
शंकर को संकट के नाशन । विघ्न विनाशन मंगल कारन ॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावें । नारद सारद शीश नवावें ॥
नमो नमो जय नमः शिवाय । सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥
जो यह पाठ करे मन लाई । ता पर होत हैं शम्भु सहाई ॥
ऋनियाँ जो कोइ को अधिकारी । पाठ करे सो पावनहारी ॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई । निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥
पंडित त्रयोदशी को लावै । ध्यान पूर्वक होम करावै ॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा । तन नहिं ताके रहै कलेशा ॥
धूप दीप नैवेद्य चढावै । शंकर सम्मुख पाठ सुनावै ॥
जन्म-जन्म के पाप नसावै । अंत धाम शिवपुर में पावै ॥
कहत अयोध्या आस तुम्हारी । जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥
नित नेम कर प्रातः ही पाठ करो चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥
मागसर छठि हेमंत ऋतु, संवत चौदस जान ।
स्तुति चालीसा शिवहिं, पूर्ण कीन कल्याण ॥
॥ इति ॥
गुजराती विकिस्रोत — "शिव चालीसा" (શિવ ચાલીસા), Aarti Bhajan Stotra.pdf, संस्करण 204071. मूल गुजराती लिपि से देवनागरी में लिप्यंतरित। CC BY-SA 4.0.
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Sanskrit text attributed to आदिशङ्कराचार्यः from The Works of Sri Sankaracharya, Volume 18 (Stotras, Vol. 2), Sri Vani Vilas Press, 1910.
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