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तदपि कछु हाथ हजु न पर्यो

Tadapi Kachu Hath Haju Na Paryo

भजन · Hindi · ⏱ 1 min

अन्य नाम · Also known as तदपि कछु हाथ हजु न पर्यो · Tadapi Kachu Hath Haju Na Paryo

अक्षर का आकार

( तोटक छंद)

यम नियम संजम आप कियो, पुनि त्याग बिराग अथाग लह्यो;
वनवास लियो मुख मौन रह्यो, द्रढ आसन पद्म लगाय दियो..१
मन पौन नोइरोध स्वबोध कियो, हठ जोग, प्रयोग सुतार भयो;
जप भेद जपे तप त्योंहि तपे, उरसेंहि उदासी लही सबपे..२
सब शास्त्रके नय धारि हिये, मत मंडन खंडन भेद लिये;
वह साधन बार अनंत कियो, तदपि कछु हाथ हजु न पर्यो..३
अब क्यों न बिचरत हे मन सें, कछु और रहा उन साधन सें;
बिन सद्गुरु कोय न भेद लहे; मुख आगलहै कह बात कहे..४
करुना हम पावत है तुम की, वह बात रही सुगुरुगमकी;
पलमें प्रगटे मुख आगलसें, जबसद्गुरुचर्न सुप्रेम बसें.. ५
तनसें, मनसें, धनसें, सबसें, गुरुदेवकी आन स्वाअत्म बसें;
तब कारज सुइद्ध बने अपनो, रस अमृत पावहि प्रेमघनो..६
वह सत्य सुधा दरशावहिंगे, चतुराअंगुल हे द्रगसें मिल हें;
रस देव निरम्जन को पिवही, गहि जोग जुगोगुग सूर बसें..७
पर प्रेम प्रवाह बढे प्रबुसें, सब आगमभेद सूउर बसें;
वह केवल को बीज ज्ञानी कहे, निजको अनुभौ बतलाई दिये..८

स्रोत · Source

गुजराती विकिस्रोत — "तदपि कछु हाथ हजु न पर्यो" (તદપિ કછુ હાથ હજુ ન પર્યો), Bhajano ane bhaktipado.pdf, संस्करण 206201. मूल गुजराती लिपि से देवनागरी में लिप्यंतरित। CC BY-SA 4.0.
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