धिक् है जगमें जीवन
भजन · Hindi · ⏱ 1 min
अन्य नाम · Also known as धिक् है जगमें जीवन · Dhik Hai Jagamem Jivan
पद ४४ राग काफी अथवा ठुमरी.
धिक् है जगमें जीवन जाको, भजन बिना देह धरी.
जब माता की कूख जन्म्यो, आनंद हरष उच्चारी,
जगमें आय भजन ना कीन्हो, जननी को भारे मारी ... धिक् है.
काग कोयल तो सब रंग एके, कोई गोरी कोई कारी,
वो बोले तक तीरज मारे, वो बोले जग प्यारी ... धिक् है
वागल तो शिर ऊंधे झूले, वाकी कोन विचारी,
कूल सब कोई करणी का चाखे, मानो बात हमारी ... धिक् है.
जूनी सी नाव, मिला खेवटिया, भवसागर बहु भारी,
मीरां कहे प्रभु गिरिधरना गुण, प्रभु मोहे पार उतारी ... धिक् है.
गुजराती विकिस्रोत — "धिक् है जगमें जीवन" (ધિક્ હૈ જગમેં જીવન), Bhajan Sar Sindhu.pdf, संस्करण 196439. मूल गुजराती लिपि से देवनागरी में लिप्यंतरित। CC BY-SA 4.0.
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