श्रीनृसिंहसरस्वतीप्रार्थनाष्टकम्
अष्टकम् · 🪷 भगवान विष्णु · Sanskrit · ⏱ 1 min
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ऋतकृत्स्वगिरोsमरोsभवद् द्विजपत्न्यास्तनयोsपि योsभवः।
स नृसिंहसरस्वती यतिर्भगवान् मेsस्ति परा वरा गतिः।।१।।
प्रणवं प्रपपाठ जन्मतो विजहाराल्पदशोsपि सन्मतः।
स नृसिंहसरस्वती यतिर्भगवान् मेsस्ति परा वरा गतिः।।२।।
मृतविप्रसुतं व्यजीवयद्य उ वंध्यामहिषीमदोहयत्।
स नृसिंहसरस्वती यतिर्भगवान् मेsस्ति परा वरा गतिः।।३।।
स्वतनुं यतये व्यदर्शयद्-द्विजगर्वं बुरुडाद्व्यनाशयत्।
स नृसिंहसरस्वती यतिर्भगवान् मेsस्ति परा वरा गतिः।।४।।
प्रददौ हि मृतप्रियस्त्रिया अपि सौभाग्यमु यन्नमस्क्रिया।
स नृसिंहसरस्वती यतिर्भगवान् मेsस्ति परा वरा गतिः।।५।।
स्वमुदेsभवदन्नवृद्धिकृत् सुवशायाsपि वंशवृद्धिकृत्।
स नृसिंहसरस्वती यतिर्भगवान् मेsस्ति परा वरा गतिः।।६।।
द्रुरकार्यपि शुष्ककाष्ठतः कुसुरौ येन शुची च कुष्ठतः।
स नृसिंहसरस्वती यतिर्भगवान् मेsस्ति परा वरा गतिः।।७।।
अमराख्यपुरे च योगिनीवरदो योsखिलदोsस्ति योगिनीः।
स नृसिंहसरस्वती यतिर्भगवान् मेsस्ति परा वरा गतिः।।८।।
।। इति श्री प. प. श्रीवासुदेवानन्दसरस्वतीविरचितं श्रीनृसिंहसरस्वतीस्तोत्रं संपूर्णम् ।।
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