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श्रीअगस्त्यकृत श्रीशिवाष्टकम्

Shriagastyakrta Shrishiva Ashtakam

अष्टकम् · 🔱 भगवान शिव · Sanskrit · ⏱ 1 min

अन्य नाम · Also known as श्रीअगस्त्यकृत श्रीशिवाष्टकम्

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अक्षर का आकार

अद्य मे सफलं जन्मः चाद्य मे सफलं तप: ।

अद्य मे सफलं ज्ञानम् शंभो त्वत्पाददर्शनात् ॥१॥

कृतार्थोऽहं कृतार्थोऽहं कृतार्थोऽहं महेश्वर ।

अद्य ते पादपद्मस्य दर्शनात्भक्तवत्सल ॥२॥

शिवश्शंभु: शिवश्शंभु: शिवश्शंभु: शिवश्शिव: ।

इति व्याहरतो नित्यम् दिनान्यायान्तु यान्तु मे ॥३॥

शिवे भक्तिश्शिवे भक्तिश्शिवे भक्तिर्भवेभवे ।

सदा भूयात् सदा भूयात्सदा भूयात्सुनिश्चला ॥४॥

आजन्म मरणं यस्य महादेवान्यदैवतम् ।

मा जनिष्यत मद्वंशे जातो वा द्राग्विपद्यताम् ॥५॥

जातस्य जायमानस्य गर्भस्थस्याऽपि देहिन: ।

मा भून्मम कुले जन्मः यस्य शंभुर्नदैवतम् ॥६॥

वयं धन्या वयं धन्या वयं धन्या जगत्त्रये ।

आदिदेवो महादेवो यदस्मत्कुलदैवतम् ॥७॥

हरश्शंभो महादेव विश्वेशामरवल्लभ ।

शिवश्शङ्कर सर्वात्मन्नीलकण्ठ: नमोऽस्तु ते ॥८॥

अगस्त्याष्टकमेतत्तु य: पठेच्छिवसन्निधौ ।

शिवलोकमवाप्नोति शिवेनस्सह मोदते ॥९॥

॥ इति श्रीअगस्त्यरचितम् श्रीशिवाष्टकम् सम्पूर्णम् ॥

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स्रोत · Source

Sanskrit Wikisource, page "श्रीअगस्त्यकृत श्रीशिवाष्टकम्", revision 36818.
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