आरती श्री रामचन्द्र जी की
आरती · 🏹 श्री राम · Sanskrit · ⏱ 1 min
अन्य नाम · Also known as Shri Ramchandra Kripalu Bhaj Man · Ram Stuti · Ram Aarti · श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन · राम स्तुति · राम आरती
तुलसीदास रचित श्रीराम की स्तुति, छह छंदों और समापन सोरठा सहित। रामनवमी और राम पूजा में गाई जाती है।
श्री रामचन्द्र कृपाल भजु मन, हरण भव भय दारूणम्।
नवकंज लोचन, कंज-मुख कर कंज पद-कंजारूणम्॥१॥
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नवनील-नीरद-सुन्दरम्।
पटपीत मानहु तड़ित रूचि सुचि नौमि जनक सुता-वरम्॥२॥
भजु दीनबन्धु दिनेश दानव-दैत्यवंश-निकन्दम्।
रघुनंद आनन्दकंद कौशलचन्द दशरथ-नन्दनम्॥३॥
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारू उदार अंग विभूषणम्।
आजानुभुज शर-चाप-धर संग्राम-जित-खर-दूषणम्॥४॥
इति वदति तुलसीदास शंकर-शेष मुनि मन रंजनम्।
मम हृदय कंज निवास कुरू कामादि-खल-दल-गंजनम्॥५॥
मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरू सहज सुन्दर सवारो।
करूणा निधान सुजान शील सनेहु, जानत रावरो॥६॥
एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय सहित हिएँ हरषीय अली।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि-२ मुदित मन मन्दिर चली।
सोरठाः
जानि गौरि अनुकूलसिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे॥
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