अघोरकष्टोद्धारणस्तोत्रम्
स्तोत्र · 🐕 भैरव · Sanskrit · ⏱ 1 min
अन्य नाम · Also known as अघोरकष्टोद्धारणस्तोत्रम्
Sanskrit text from Sanskrit Wikisource.
श्रीपाद श्रीवल्लभ त्वं सदैव। श्री दत्तास्मान पाहि देवाधीदेव॥
भावग्राह्य क्लेशहारिन सुकीर्ते। घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते॥
त्वं नो माता त्वं पिताप्तो दिपस्त्वं। त्रातायोगक्षेमकृसद्गुरुस्त्वम॥
त्वं सर्वस्वं नो प्रभो विश्वमूर्ते। घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते॥
पापं तापं व्याधीमाधींच दैन्यम। भीतिं क्लेशं त्वं हराऽशुत्व दैन्यम॥
त्रातारंनो वीक्ष इशास्त जूर्ते। घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते॥
नान्यस्त्राता नापि दाता न भर्ता। त्वत्तो देवं त्वं शरण्योकहर्ता।
कुर्वात्रेयानुग्रहं पुर्णराते। घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते॥
धर्मेप्रीतिं सन्मतिं देवभक्तिं। सत्संगाप्तिं देहि भुक्तिं च मुक्तिं
भावासक्तिंचाखिलानन्दमूर्ते। घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते॥
श्लोकपंचकमेतद्यो लोकमंगलवर्धनम।
प्रपठेन्नियतो भक्त्या स श्रीदत्तप्रियोभवेत॥
॥इति श्रीमत्वासुदेवानंदसरस्वतिविरचितं अघोरकष्टोद्धारणस्तोत्रम सम्पूर्णम॥
Sanskrit Wikisource, page "अघोरकष्टोद्धारणस्तोत्रम्", revision 408406.
Sanskrit Wikisource · Creative Commons BY-SA
Text from Sanskrit Wikisource (sa.wikisource.org), used under CC BY-SA 4.0. Page history and contributors are linked from the source URL recorded with each text.
सम्बन्धित पाठ · Related reading
Sanskrit text from Sanskrit Wikisource.
Sanskrit text attributed to आदिशङ्कराचार्यः from The Works of Sri Sankaracharya, Volume 18 (Stotras, Vol. 2), Sri Vani Vilas Press, 1910.
Sanskrit text attributed to आदिशङ्कराचार्यः from The Works of Sri Sankaracharya, Volume 17 (Stotras, Vol. 1), Sri Vani Vilas Press, 1910.
Sanskrit text from Sanskrit Wikisource.
Sanskrit text from Sanskrit Wikisource.
Sanskrit text from Sanskrit Wikisource.