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आरती श्री कुन्जबिहारी जी की

Kunj Bihari Aarti

आरती · 🦚 श्री कृष्ण · Hindi · ⏱ 1 min

अन्य नाम · Also known as Aarti Kunj Bihari Ki · Shri Girdhar Krishna Murari · आरती कुंजबिहारी की · श्रीगिरिधर कृष्णमुरारी की

श्रीकृष्ण की आरती, जिसमें गिरिधर कृष्णमुरारी के मोर-मुकुट, मुरली और वृन्दावन की छवि का वर्णन है।

अक्षर का आकार

आरती कुंजबिहारी। श्रीगिरिधर कृष्णमुरारी की॥ (टेक)

गले में बैजंतीमाला, बजावै मुरलि मधुर बाला।
श्रवन में कुण्डल झलकाला, नंद के आनन्द नन्दलाला ॥ श्री गिरिधर॥

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली,
लतन के ठाढ़े बनमाली, भ्रमर-सी अलक,
कस्तूरी-तिलक, चन्द-सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की। श्रीगिरिधर कृष्णमुरारी की॥

कनकमय मोर-मुकुट बिलसै, देवता दरसन कों तरसै,
गगन सों सुमन रासि बरसै,
बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिनि संग
अतुल रति गोपकुमारी की। श्रीगिरिधर कृष्णमुरारी की॥

जहाँ ते प्रकट भई गंगा, सकल-मल हारिणि श्रीगंगा,
स्मरण ते होत मोह भंगा,
बसी शिव सीस, जटाके बीच, हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारीकी। श्रीगिरिधर कृष्णमुरारी की॥

चमकती उज्जवल तट रेनू, बज रही बृन्दावन बेनू,
चहुँ दिसि गोपि ग्वाल धेनू,
हँसत मृदु मंद, चाँदनी चंद, कटत भव-फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की। श्रीगिरिधर कृष्णमुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी। श्रीगिरिधर कृष्णमुरारी की॥

स्रोत · Source

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